पप्पू पास हो गया
पप्पू पास हो गया
गाँव के छोटे से कस्बे में रहने वाला पप्पू पढ़ाई में हमेशा कमजोर रहा था। चौथी कक्षा में तीन बार फेल होने के बाद, पूरा गाँव उसे मज़ाक में "फेलू पप्पू" कहने लगा था। लेकिन पप्पू की माँ को हमेशा यकीन था कि उसका बेटा भी एक दिन कुछ बड़ा करेगा।
पप्पू की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब गाँव के पास एक नई लाइब्रेरी खुली। वहाँ किताबों की दुनिया देखकर पप्पू का मन पढ़ाई में लगने लगा। उसने तय किया कि इस बार परीक्षा में पास होकर दिखाएगा। लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—गणित!
गणित के मास्टर जी, जो पप्पू को हमेशा डाँटते रहते थे, उन्होंने भी उम्मीद छोड़ दी थी। मगर पप्पू ने हार नहीं मानी। वह रोज़ रात को टॉर्च जलाकर चुपचाप पढ़ाई करता, गणित के सवाल हल करता और अपनी कमजोरियों पर काम करता।
परीक्षा का दिन आया। पप्पू ने पूरी मेहनत से पेपर दिया, लेकिन रिजल्ट के दिन उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। जब प्रधानाचार्य ने घोषणा की— "इस बार पप्पू पास हो गया!" तो पूरा स्कूल ताली बजाने लगा। गाँव में यह बात आग की तरह फैल गई, और हर कोई चकित था।
अमिताभ बच्चन की फिल्म के डायलॉग की तरह गाँववालों ने भी चुटकी ली— "पप्पू पास हो गया!" लेकिन इस बार यह मज़ाक नहीं, बल्कि गर्व की बात थी।
उस दिन पप्पू की माँ की आँखों में आंसू थे—खुशी के आँसू! और पप्पू? अब वह "फेलू पप्पू" नहीं, बल्कि "पढ़ाकू पप्पू" बन गया था!
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