गिरा हुआ पप्पू – एक हास्य कथा

 


गिरा हुआ पप्पू – एक हास्य कथा

गाँव में पप्पू अपनी बेवकूफी और उल्टी सोच के लिए बदनाम था। वह अक्सर बिना सोचे-समझे बातें करता और खुद ही मुसीबत में फँस जाता। लेकिन इस बार जो हुआ, उसने पूरे गाँव को हँसने पर मजबूर कर दिया।

शक का बीज

पप्पू की शादी दो साल पहले रज्जो से हुई थी। कुछ महीने पहले ही रज्जो ने एक प्यारे से लड़के को जन्म दिया। पूरा गाँव खुश था, लेकिन पप्पू के दिमाग में अजीब शक पलने लगा। वह रोज़ बच्चे को ध्यान से देखता और सोचता, "कहीं ये मेरा बेटा तो नहीं दिखता!"

फिर एक दिन उसकी पत्नी बच्चे को गोद में लेकर बैठी थी कि पप्पू चिल्लाया,
"रज्जो! सच-सच बता, ये लड़का मेरे बाप का है ना?"

गाँव वालों को लगा, उन्होंने कुछ गलत सुना है। लेकिन पप्पू ज़िद पर अड़ा रहा। उसने गाँव के पंचों को बुलाकर ऐलान किया,
"मुझे पूरा यकीन है कि ये बच्चा मेरे बाप का है, मेरी बीवी ने धोखा दिया है!"

गाँव वालों की चकरघिन्नी

गाँव के बूढ़े चौधरी साहब ने माथा पीट लिया,
"अरे पप्पू, तू खुद उस बच्चे का बाप है!"

लेकिन पप्पू नहीं माना,
"नहीं चौधरी जी! मेरी शक्ल इस पर नहीं गई, लेकिन मेरे बाप की शक्ल हूबहू मिलती है। इसका मतलब साफ़ है!"

गाँव में हंसी का तूफान आ गया। कोई खेत में लोटपोट हो गया, तो कोई कुएँ पर बैठा हंसते-हंसते गिरने वाला था।

पप्पू की बेइज्जती

गाँव की औरतों ने रज्जो को समझाया कि उसका पति दुनिया का सबसे बड़ा गधा है। रज्जो को भी गुस्सा आ गया। उसने पप्पू के कान खींचे और बोली,
"अबे गधे! बेटा तेरे बाप से मिलता है तो क्या मतलब कि तेरा नहीं है? अरे, तू खुद भी तो अपने बाप पर गया है! अब क्या तुझे भी अपने बाप का बेटा मानने से इनकार कर दें?"

गाँव वालों ने एक सुर में कहा,
"पप्पू, तू पूरी तरह गिर चुका है!"

पप्पू को अब जाकर समझ आया कि उसने कितनी बड़ी बेवकूफी कर दी। लेकिन तब तक उसकी बेइज्जती गाँव के हर घर में चर्चा का विषय बन चुकी थी।

और इस तरह पप्पू की शक वाली सोच ने उसे पूरे गाँव में हंसी का पात्र बना दिया!

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